विशेष संपादकीय – भारत निधि लाइव न्यूज़
लेखक/विचार: सचिन पठारे
आज समाज में एक बहुत बड़ा विरोधाभास देखने को मिलता है। लोग उन चीज़ों से प्यार करते हैं जिनका कोई वास्तविक मूल्य नहीं है और जिन्हें किसी इंसानी दिमाग ने ही बनाया है। हम फालतू चीज़ों और भौतिक सामानों की पहरेदारी और सुरक्षा में अपनी पूरी जिंदगी लगा देते हैं, लेकिन जिस इंसान के जीवन के लिए ये सब बनाया गया था, उसी इंसानी जान की कोई परवाह नहीं करता।
पैसा और सामान सब कचरा है, अगर इंसान की ही कदर न हो:
सच तो यह है कि लोग जिस पैसे और सामान की दिन-रात सुरक्षा करते हैं और जिसके लिए एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू हो जाते हैं, वह सब एक दिन कचरा ही साबित होता है।
लोग यह बुनियादी मतलब ही भूल चुके हैं कि:
पैसा इंसानों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था।
पैसा इसलिए बना था ताकि लोग एक-दूसरे की मदद कर सकें और आराम से जीवन जी सकें।
लेकिन आज स्थिति उल्टी हो चुकी है—चीज़ों की सुरक्षा हो रही है और इंसानों को मारा जा रहा है। दुनिया आज कचरे से प्यार कर रही है और इंसानियत को भूल रही है। इस सोच को बदलने की सख्त जरूरत है।
जय हिंद! जय महाराष्ट्र!
भारत निधि लाइव न्यूज़
सचिन पठारे
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